मैहर में घूमने की जगह

शांत वातावरण, सांस्कृतिक और विरासत वैभव या फिर हिल स्टेशन, मैहर हमेशा पर्यटकों को आकर्षित करता है। मैहर, सतना पहले के समय में एक रियासत हुआ करती थी, यही कारण है कि इसमें बघेल राजपूतों, परिहार राजपूतों और कछवाहा राजपूतों के कुलों का प्रभाव है।

तो, मैहर, सतना के आसपास एक शानदार छुट्टी मनाने के लिए आकर्षक पर्यटन स्थलों की कोई कमी नहीं है। चलिए आपको बताते हैं मैहर में घूमने की खूबसूरत जगहों के बारे में।

शारदा देवी मंदिर

त्रिकूट पहाड़ी के ऊपर बना सतना के मैहर में स्थित मां शारदा देवी मंदिर एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। यहाँ तक पहुचने के लिये आपको लगभग 1063 सीढ़ियां चढ़ का जाना पड़ता हैं। उन तीर्थयात्रियों के लिए एक रोपवे तैयार किया गया है जो चढ़ाई चढ़ने में असमर्थ हैं।

मैहर का अपना एक अलग इतिहास और किंवदंती भी है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने मृत देवी मां सती के शरीर को ले जाते समय अपना हार या ‘हर’ यहां गिरा दिया, जिससे इस स्थान का नाम मैहर पड़ा।

कहा जाता है – आल्हा और उदल, जो शारदा देवी के भक्त थे, सबसे पहले घने जंगल में मंदिर गए और शारदा माई के नाम से देवी को संबोधित किया था। आप मंदिर से ही आल्हा और उदल का तालाब देख सकते है।

यहाँ के शानदार दृश्यों को देखने के लिए आप रोपवे की सवारी भी कर सकते है। पहाड़ियों और हरी-भरी वनस्पतियों के बीच यदि आप कुछ शांतिपूर्ण समय बिताना चाहते है तोआप इसके लिये आपको आल्हा तालाब जाना चाहिये।

मंदिर के पीछे आप एक शानदार अखाड़ा है। जो भगवान शिव को समर्पित है, यहाँ गोला मठ मंदिर, बडीमाई मंदिर, ऑयला मंदिर, पन्निखोह जलप्रपात; पूर्वा जलप्रपात मैहर के कुछ अन्य आकर्षण जगह है जहाँ आपको अवश्य जाना चाहिए।

वेंकटेश मंदिर

लाल पत्थर से बना वेंकटेश मंदिर 1876 में बनाया गया था। मुख्तारगंज के पास स्थित है जब तालाब के पानी की लहरें आती है तो इसकी सुन्दरता में चारचांद लगा जाती हैं, यहाँ आप शांति का अनुभव कर सकते है।

दक्षिण भारतीय मंदिरों के डिजाइन के आधार पर विकसित, इस मंदिर को बनाने में लगभग 49 साल लगे, इसको बनाने के लिए कार्यकर्ता दक्षिण भारत से आए थे।

यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों में से कुछ इस प्रकार हैं कैसे गुरु पूर्णिमा, झूलन महोत्सव, नरसिंह चतुर्दशी, जन्माष्टमी, रामनवमी, शरद पूर्णिमा और बहुत कुछ शामिल हैं। रंदमन सिंह द्वारा स्थापित यह मंदिर विंध्य क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।

माधवगढ़ किला

रीवा हाईवे में स्थित माधवगढ़ किला सतना की यात्रा में शामिल करने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। तमस नदी पर बने पुल से यह किला बेहद आकर्षक लगता है। किले की दीवारों पर बनी खूबसूरत पेंटिंग इसे सतना के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बनाती है।

इस किले के बाहर आपको कुछ छतरियां देखने को मिल जाती हैं। इन छतरियों में एक शिवलिंग स्थापित है। किला 400 साल पुराना है। माधवगढ़ किला रीवा रियासत के महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव द्वारा बनवाया गया था। इस किले का निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था। यह किला बघेली शैली में है।

यह किला हाईवे रोड से भी बहुत अच्छी तरह से दिखाई देता है। यदि आप विरासती पर्यटक आकर्षणों को देखना पसंद करते हैं तो आपको माधवगढ़ किले की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी।

इस जगह की एक कमी यह है कि आप इस किले को केवल बाहर से ही देख सकते हैं।

भरहुत स्तूप

अगर आप मैहर जा रहे है तो सतना के पास एक और अद्भुत भरहुत स्तूप है। अगर आप सतना के आसपास के सामान्य दर्शनीय स्थलों से कुछ अलग देखना चाहते हैं तो आपको इस जगह की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।

यह सम्राट अशोक द्वारा निर्मित एक प्रसिद्ध बौद्ध स्थल है। आपको यहां पुराने बौद्ध अवशेष और मूर्तियां देखने को मिलेंगी, जिनकी खोज एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् अलेक्जेंडर कनिंघम ने वर्ष 1873 में की थी।

1870 तक भरहुत भारत के अधिकांश लोगों के लिए अज्ञात था। पर आज यहाँ हजारों की संख्या में लोग आते है, यहां आपको राजा अशोक के कुछ दिलचस्प शिलालेख, प्राचीन बौद्ध अवशेष और मूर्तियां देखने को मिलेंगी।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान

यदि आप सतना के पास घूमने के लिए हरियाली से भरपूर सबसे अच्छी जगह की तलाश कर रहे हैं, तो पन्ना नेशनल पार्क आपकी इंद्रियों और आत्मा को फिर से जीवंत करने का वाला स्थान है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भी मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है।

पन्ना नेशनल पार्क में शाही बाघ, तेंदुआ (पैंथेरा पार्डस), जंगली कुत्ता (कून अल्पाइनस), भेड़िया (कैनिस ल्यूपस), लकड़बग्घा, चीतल, चिंकारा, भालू, नीलगाय सहित विभिन्न वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में रोमांचकारी वन्य जीवन सफारी का आनंद लेने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं। इस पार्क में वन्यजीवों के साथ-साथ सफेद गर्दन वाले सारस, हंस, शहद की बज़र्ड, किंग वल्चर, ब्लॉसम और अजगर सहित विभिन्न प्रकार के सांपों सहित पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं।

पार्क का शांत जंगल प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के भी होश उड़ा देता है। वास्तव में, यह 100 किमी के भीतर सतना के पास घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है।

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